picking lilies on the western slopes,
losing myself in the southern hills,
falling snow and the mountain mist,
the sunset light,
birds flocking home together.
#Poetry #Philosophy #Pathos #Zen #Wisdom #Absurdities
काश हमने कह दिया होता और तुमने सुन लिया होता कभी तुम भी तो कुछ कहा करो सरे शाम हमसे मिला करो ये जूनून सर पे चड़ा है अब के दिल बुरी तरह बेखबर तूने मुझसे सब कुछ कह दिया वो कहा नहीं जो चाहिए मुझे और कुछ भी न चाहिए इकरार हो तो करार मिले यूँ ही बेसबब न फिरा करे लेके दिल अँधेरी गलियों में गिरे फीर उठे और फीर गिरे कहाँ जाये कहाँ से लेके आये सुकून उम्र भर का हम तुझे तीन लव्ज़ है कहने अपनी जान अटकी हलक में है इसी इंतज़ार में हमदम बेखबर से रहते है कुछ सुनते है कुछ कहते है रौशनी जहाँ को हम तेरे नाम की ही देते हैं
कोई कहता है जा काबा कोई कहता है मदीना किसी को नाज़ है तुझ पे कोई कहता है नगीना कोई कहता है ख़बरदार है तोहफा यह ज़िन्दगी मिलती नहीं हर किसी को ये रहमत, ये निगेबानी जो मिले भीख में उसी से कर तू गुज़र पानी यह भाग्य है तेरा अब भी संभल जा ऐ नीच न मिला है, न मिलेगा किसी वक़्त इससे सवेरा क्यूँ ढूँढता फिरे है तू दर बदर लेके चिराग जो मिला है उसी से खुश कर अपना मलाल या खुदा उठा ले मुझे या मिटा दे ये खलिश क्यूँ बुत बना बैठा है अपने चौबारे पे देखे है तमाशा
मैंने जना था उसे सूक्ष्म से स्थूल तक पनाह दी वक़्त को थाम दिया जब अपने शरीर में फला था उसे न मैं थी न मेरा वजूद था बस तुम ही तुम थी नन्ही सी कली मेरे अंश से निकली एक सुन्दर सी परी छोटे छोटे खिलोनो से कैसे ऊबती थी तुम एक चुनरी और पाजेब लेके कैसे घंटों झूलती थी तुम नन्हे पैरों से मेरी दिल की सूखी ज़मीं पे बरसती थी तुम वक़्त बढता ही गया कितने मौसम आये तुम्हारे प्यार का मौसम भी आया जो हमे ना भाया क्योंकर तुमने हिम्मत की अपने ही गोत्र में क्या प्यार को समझा नहीं सकती थी की दूसरा कोई गोत्र खोजो ये लड़का जो पसंद है मुझे इसका मजमून बदल दो मेरी माँ और पिता की पुश्तों से इसे अलग कर दो इतना गुरूर तुम में किस प्यार ने पैदा किया हमसे जनि और हमसे ही न माने फीर एक रात मौका देख तुम्हे मौत सुनाई पंचायत ने करी हमारी इज्ज़त की रुसवाई मुझे किया गुनाहगार जिसको पाला था मैंने अपने हाथों का छाला बनाकर उसी का गला घोटूं जल्लाद बनकर गयी रात मार दिया मैंने उसे तोड़ दी उसकी सासे मिटा दी उसकी आखों से वो रौशनी जो मुझे कभी रास्ता दिखाती थी तुमने कितनी मिन्नतें करी मैंने न सुना अपने जिगर के टुकड़े को काट दिया मैंने गयी र...
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