picking lilies on the western slopes,
losing myself in the southern hills,
falling snow and the mountain mist,
the sunset light,
birds flocking home together.
#Poetry #Philosophy #Pathos #Zen #Wisdom #Absurdities
कोई कहता है जा काबा कोई कहता है मदीना किसी को नाज़ है तुझ पे कोई कहता है नगीना कोई कहता है ख़बरदार है तोहफा यह ज़िन्दगी मिलती नहीं हर किसी को ये रहमत, ये निगेबानी जो मिले भीख में उसी से कर तू गुज़र पानी यह भाग्य है तेरा अब भी संभल जा ऐ नीच न मिला है, न मिलेगा किसी वक़्त इससे सवेरा क्यूँ ढूँढता फिरे है तू दर बदर लेके चिराग जो मिला है उसी से खुश कर अपना मलाल या खुदा उठा ले मुझे या मिटा दे ये खलिश क्यूँ बुत बना बैठा है अपने चौबारे पे देखे है तमाशा
आओ आज हम दोनों इस बेमौसम बरसात में अपने अपने गम भिगो ले तुम अपनी सारी का एक कोना काट के फेक दो इस सुलगती आग पर जिससे कभी तुमने पोछे थे उसके आँसू मैं भी अपने दिल से निकालू उस भूली याद को जब उसने मुझे कातिलाना नज़रों से देखा था पहली पहली बार तुम भी दिल को नश्तर करती उस शिकायत से पूछो क्या तुमने भी कभी मुझे याद किया या मैं ही सुलगती रही रात भर उम्र भर मैं भी उस बूढी ईमारत के सूखे पेड़ से जा के पूछूंगा तुमने तो देखा था हमे क्या कमी रह गयी थी मुझमे क्यों मिल गए ये सूखे दिन ये भूली रातें मुझे सौगात में तुम भी कह दो उन हवाओं से ना उलझाये तुम्हारी जुल्फें यूं की उलझ जाती है तुम्हारी आरज़ू इन्ही जुल्फों की कैद में आओ आज सब गिले शिकवे यहीं इसी आग में भस्म करें इन हवाओं को बाँट ले आधा आधा इन बूंदों से पूछे एक नया रास्ता और एक नयी ज़िन्दगी का पता लिखे रेगिस्तान की मिटटी पर पानी के अक्षर से एक साथ तुम चलोगी ?
काश हमने कह दिया होता और तुमने सुन लिया होता कभी तुम भी तो कुछ कहा करो सरे शाम हमसे मिला करो ये जूनून सर पे चड़ा है अब के दिल बुरी तरह बेखबर तूने मुझसे सब कुछ कह दिया वो कहा नहीं जो चाहिए मुझे और कुछ भी न चाहिए इकरार हो तो करार मिले यूँ ही बेसबब न फिरा करे लेके दिल अँधेरी गलियों में गिरे फीर उठे और फीर गिरे कहाँ जाये कहाँ से लेके आये सुकून उम्र भर का हम तुझे तीन लव्ज़ है कहने अपनी जान अटकी हलक में है इसी इंतज़ार में हमदम बेखबर से रहते है कुछ सुनते है कुछ कहते है रौशनी जहाँ को हम तेरे नाम की ही देते हैं
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